अद्वैत हो रहा प्रेम मेरा*
मेरे रोम रोम में,
श्याम बसे,
श्याम संग नाता है अटूट!
जीवन जीना है,
श्याम संग,
जीवन का अंत भी,
श्याम संग,
श्याम की प्रीत में,
रंग गई,
श्याम से मेरी,
प्रेम सगाई!
अब,दुनिया दारी मैं भूल गई!
जो भी करना,
जो भी धरना,
अद्वैत हो रहा प्रेम मेरा।।
अब खुशियाँ भी
तेरे संग संग,
और गम भी,
तेरे संग संग,
सर्वस्व किया,
अर्पण तुमको,
अद्वैत हो रहा प्रेम मेरा।।
जब भी विचलित,
हो जाये मन!
एक तारा लेकर,
निकल पडूँ,
तेरी भक्ति में,
मैं लीन रहूँ,
अद्वैत हो रहा प्रेम मेरा।।




श्रीमती मीनाक्षी त्रिवेदी,'मौनी' वडोदरा

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