अजब सिंगार अरु ग़ज़ब लुनाई देखो ,
रंग औ उमंग की भी नई ही मिसाल है ।
रस-अवतार आप चिर हैं युवान श्रीजी
मोह रहे अह-निस वृद्ध औ अबाल हैं ।
सरल के सखा आप खलन के काल प्रभु
आप हैं,उदार अति हृदय बिसाल है ।
त्राण देते सबन के राखा आप बनवारी ,
आपके आगे न टिके बिपद को जाल है ।।


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