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Wednesday, September 1, 2021

श्रीनाथ जी के कवित् का प्रेषण - रविकान्त सनाढ्य




अजब सिंगार अरु ग़ज़ब लुनाई देखो , 
रंग औ उमंग की भी नई ही मिसाल है ।
रस-अवतार आप चिर हैं युवान श्रीजी 
मोह रहे अह-निस वृद्ध औ अबाल हैं ।
सरल के सखा आप खलन के काल प्रभु 
आप हैं,उदार अति हृदय बिसाल है ।
त्राण देते सबन के राखा आप बनवारी , 
आपके आगे न टिके बिपद को जाल है ।।








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